Hindi Poetry

सत्य

रौबदार, सीधा- सपाट
पूर्ववत
काला- स्याह
किन्तु स्पष्ट

कभी कड़वा- कसैला
दिल दुखाता,
हर्षाता, कभी उल्लास
शक्तिदाता

कभी सूखे दरख़्त- सा
नंगा- निर्वस्त्र
कभी मरियल, किन्तु अटल
निर्भय, निडर

कभी ऐसा भी होता
ना रहकर भी रहता
कभी रहकर भी विलुप्त
कभी चुप, कभी गुप्त।

कभी पीछे धकेलता
कभी आगे ले चलता
डूबते तैरते,
कभी पार ले जाता।

कभी छाँव, कभी धूप
सत्य के हैं कई रूप।

खोलो परतें
करो आलिंगन
सत्य तुम भी, हम भी
और यह जीवन। ©

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *